पंचायतीराज चुनाव में पायलट गुट देगा कांग्रेस को बड़ा झटका!

पंचायतीराज चुनाव में पायलट गुट देगा कांग्रेस को बड़ा झटका!

जयपुर (मरूधर बुलेटिन)। प्रदेश के छह जिलों में पंचायतीराज चुनावों के तहत जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनावों में इस बार सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को करारा झटका लग सकता है और हार का सामना करना पड़ सकता है। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाने से नाराज गुर्जर समाज इस बार भाजपा को वोट देकर अपने गुस्से का इजहार कर सकता है। हालांकि निकाय चुनावों में कांग्रेस पार्टी विपक्षी पार्टी से बढ़त बनाने में कामयाब हो गई थी मगर इस बार कांग्रेस की राह मुश्किल नजर आ रही है। इधर पूर्व उप मुख्यमंत्री और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट भी मंत्रीमंडल विस्तार की चर्चाओं के बाद से चुप्पी साधे हुए है। पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव हालांकि सरकार के कार्यों की कसौटी पर नहंी लड़े जाते है इसमें स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और कुछ हद तक पार्टी का सिंबल ही मायने रखता है। काबिले गौर है कि पंचायत पुनर्गठन मामले में हाईकोर्ट की रोक के बाद प्रदेश के 12 जिलों में चुनाव रोक दिए गए थे। अब हाईकोर्ट की चुनावों के लिए हरी झंडी के बाद चुनाव आयोग पहले चरण में छह जिलों जयपुर, भरतपुर, दौसा, जोधपुर, सवाईमाधोुपर और सिरोही में चुनाव करा रहा है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार को ढाई वर्ष हो चुके है लेकिन अभी भी सचिन पायलट गुट को पार्टी में सम्मान नहीं मिला है और मंत्रीमंडल विस्तार में इस गुट को तरजीह देने की मांग सचिन पायलट लगातार कांग्रेस आलाकमान से कर रहे है। प्रदेश में जिन छह जिलों में चुनाव प्रक्रिया जारी है उनमें ग्राउंड लेवल पर देखा जाए तो गुर्जर समाज में सचिन पायलट को कांग्रेस पार्टी में उचित सम्मान नहीं दिए जाने के कारण खासा आक्रोश व्याप्त है। यह आक्रोश इन चुनावों में क्या गुल खिलाएगा, यह तो चुनावों के बाद ही पता चलेगा मगर यह चुनाव प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए भी काफी अहम है। इन चुनावों में यदि कांग्रेस पार्टी जीतती है तो यह अशोक गहलोत सरकार के कार्यों पर जनता की मुहर मानी जाएगी और गहलोत का कद बढ़ जाएगा। वहीं दूसरी और इन चुनावों में भाजपा की जीत होती है तो भाजपा को सरकार पर हमलावर होने और घेरने का मौका मिलेगा वहीं दूसरी और सचिन पायलट गुट के समर्थक इसे सचिन पायलट को कांग्रेस पार्टी में उचित सम्मान नहीं दिए जाने से जोड़कर प्रचारित करेंगे। बहरहाल समय रहते सरकार नहीं चेती तो इन चुनावों में गुर्जर समाज की नाराजगी कांग्रेस पार्टी के लिए भारी पड़ सकती है।